नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों की नाराजगी की चर्चा, 14 दिन का अल्टीमेटम देने की खबर; पार्टी नेताओं ने बगावत की अटकलों को किया खारिज
श्रीनगर, 2 नवंबर 2026। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के करीब 25 विधायक सरकार और पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं। बताया जा रहा है कि इन विधायकों ने अपनी पांच मांगें रखी हैं और उन्हें पूरा करने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को 14 दिन का समय दिया है। हालांकि, विधायकों की ओर से सरकार से समर्थन वापस लेने या बगावत करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी के कुछ नेताओं और विधायकों ने इन अटकलों को खारिज किया है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, नाराज विधायकों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर वे राजभवन जाकर औपचारिक रूप से समर्थन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यह चर्चा उस समय तेज हुई, जब विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर कुछ नाराज विधायकों की बैठक होने की खबर सामने आई।
क्या हैं नाराज विधायकों की पांच मांगें?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नाराज विधायकों की ओर से नेतृत्व के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
सरकार के मौजूदा मंत्रियों को हटाकर नया मंत्रिमंडल बनाया जाए।
मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार को बदला जाए।
नए मंत्रिपरिषद का गठन निष्पक्ष तरीके से किया जाए।
मंत्री पदों पर नियुक्ति से पहले विधायक दल की बैठक बुलाई जाए।
अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए की बहाली के मुद्दे पर ठोस पहल की जाए।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ी नाराजगी की चर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के कुछ वरिष्ठ विधायकों में असंतोष की स्थिति बनी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार विधायकों अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को मंत्रिपरिषद में शामिल किया था।
बताया जा रहा है कि मंत्री पद नहीं मिलने से कुछ वरिष्ठ विधायक निराश हुए। छह बार के विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गुल तथा अब्दुल मजीद लारमी ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताई थी।
सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने भी उठाए सवाल
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी भी पार्टी नेतृत्व और सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने अनुच्छेद 370 की बहाली, कैदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मेहदी ने पार्टी और लोकसभा सदस्यता छोड़ने की बात कही है तथा 3 नवंबर की तारीख तय की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी ने चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं किया। उनका कहना है कि अनुच्छेद 370 की बहाली और लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को अपनी प्रतिबद्धता निभानी चाहिए।
90 सदस्यीय विधानसभा में NC के पास 41 विधायक
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं और नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर नाराजगी की खबरों ने सरकार की स्थिरता को लेकर चर्चाएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, केवल नाराजगी की खबरों के आधार पर सरकार गिरने का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक हिलाल अकबर लोन ने विधायक के आवास पर हुई बैठक को गलत अर्थ दिए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने पार्टी और नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि उनका पार्टी छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। उनके बयान से साफ है कि पार्टी के भीतर बगावत की खबरों को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं।
फिलहाल उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर उठ रही नाराजगी को दूर करना और विधायकों के बीच भरोसा बनाए रखना है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और विधायकों के अगले कदम से इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
सोशल मीडिया के लिए संक्षिप्त सारांश: जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार को लेकर सियासी हलचल तेज है। रिपोर्टों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 25 विधायकों की नाराजगी और पांच मांगों की चर्चा है। हालांकि, सरकार से समर्थन वापसी या बगावत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उमर अब्दुल्ला सरकार पर सियासी संकट के बादल! 25 विधायकों की नाराजगी और 5 मांगों से बढ़ी हलचल लाइव ज़ोन || समीर खान
