पटना, 2 नवंबर 2026। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के संपन्न और आयकर देने वाले परिवारों से हर महीने मिलने वाली 125 यूनिट मुफ्त बिजली की सब्सिडी स्वेच्छा से छोड़ने की अपील की है। मुख्यमंत्री की इस अपील के बाद राज्य में बिजली सब्सिडी और सरकारी खर्च को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रसोई गैस सब्सिडी छोड़ने वाली ‘Give It Up’ मुहिम की तर्ज पर देखा जा रहा है।
क्या है मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अपील?
मुख्यमंत्री की अपील के अनुसार, आर्थिक रूप से सक्षम और आयकरदाता परिवार चाहें तो 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ स्वेच्छा से छोड़ सकते हैं। इसका उद्देश्य सरकारी सब्सिडी के खर्च को कम करना और उपलब्ध सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल जरूरत के दूसरे क्षेत्रों में करना है।
यह अपील स्वैच्छिक बताई गई है। इसका मतलब है कि मुफ्त बिजली योजना को सभी उपभोक्ताओं के लिए बंद करने की घोषणा नहीं की गई है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को मिलने वाली राहत जारी रखने की बात कही गई है।
हर साल 23 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का दावा
मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि बिहार सरकार 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना पर हर साल लगभग 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। ऐसे में सरकार चाहती है कि जो परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हैं, वे अपनी इच्छा से सब्सिडी छोड़कर सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम करने में सहयोग करें।
हालांकि, इस राशि और सब्सिडी छोड़ने से होने वाली संभावित बचत का आधिकारिक वित्तीय विवरण सामने आने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
बची राशि से शिक्षा व्यवस्था सुधारने की योजना
मुख्यमंत्री की अपील के पीछे एक प्रमुख उद्देश्य बिहार की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना बताया गया है। सरकार का विचार है कि यदि संपन्न परिवार सब्सिडी छोड़ते हैं तो बचने वाले संसाधनों का इस्तेमाल स्कूलों की सुविधाएं बढ़ाने, शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर देने में किया जा सकता है।
मोदी की ‘Give It Up’ मुहिम से हो रही तुलना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले सक्षम परिवारों से रसोई गैस की सब्सिडी छोड़ने की अपील की थी। इस अभियान का उद्देश्य सब्सिडी का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना था। अब बिहार में बिजली सब्सिडी छोड़ने की अपील को भी इसी सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर इसे ‘गुरु के नक्शेकदम पर चेले की गुजारिश’ जैसे शब्दों के साथ साझा किया जा रहा है। हालांकि, यह सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया है, सरकार की आधिकारिक शब्दावली नहीं।
क्या बंद हो जाएगी 125 यूनिट मुफ्त बिजली?
फिलहाल दी गई जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री की अपील का मतलब मुफ्त बिजली योजना को बंद करना नहीं है। संपन्न और आयकरदाता परिवारों से केवल स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने का आग्रह किया गया है। आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा जारी रहने की बात कही गई है।
अब देखना होगा कि कितने संपन्न परिवार इस अपील को स्वीकार करते हैं और इससे सरकारी खर्च तथा शिक्षा व्यवस्था को कितना लाभ मिलता है।
