उपभोक्ता अदालतों में मामलों का समय पर निपटारा हो, हर तारीख पर सुनवाई और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई जरूरी

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लाइव ज़ोन || समीर खान

उपभोक्ता अदालतों में मामलों का समय पर निपटारा हो, हर तारीख पर सुनवाई और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई जरूरी

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उपभोक्ता अदालतों में न्याय की समयसीमा तय हो, तभी आम लोगों का भरोसा और अदालतों का सम्मान मजबूत होगा

पटना, 4 नवंबर 2026: उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए गठित उपभोक्ता अदालतों में मामलों का निपटारा तय समयसीमा के भीतर होना चाहिए। आम नागरिक अपनी मेहनत की कमाई, खराब सामान, सेवा में कमी, बीमा, बैंकिंग और अन्य उपभोक्ता विवादों से जुड़े मामलों में न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचते हैं। लेकिन यदि उन्हें बार-बार तारीखों का सामना करना पड़े और सुनवाई में अनावश्यक देरी हो, तो न्याय मिलने का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।

उपभोक्ता अदालतों में प्रत्येक निर्धारित तारीख पर सुनवाई होनी चाहिए। बिना ठोस कारण के बार-बार अगली तारीख देने की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है। साथ ही, हर मामले के निपटारे के लिए उसकी प्रकृति के अनुसार स्पष्ट समयसीमा निर्धारित होनी चाहिए, ताकि शिकायतकर्ता को यह पता रहे कि उसके मामले पर कब तक फैसला आने की उम्मीद है।

यदि किसी पक्ष, अधिवक्ता, अधिकारी या संबंधित कर्मचारी की जानबूझकर की गई लापरवाही के कारण सुनवाई प्रभावित होती है या मामले के निपटारे में अनावश्यक देरी होती है, तो निष्पक्ष जांच के बाद जिम्मेदार व्यक्ति पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, वास्तविक और उचित कारणों से होने वाली देरी को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

सरकार और न्यायिक व्यवस्था को उपभोक्ता अदालतों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता, डिजिटल सुनवाई और आदेशों की समय पर जानकारी जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना चाहिए। इससे आम लोगों का समय और पैसा बचेगा तथा न्याय व्यवस्था पर उनका भरोसा बढ़ेगा।

न्याय केवल फैसला सुनाने का नाम नहीं है, बल्कि समय पर न्याय देना भी उतना ही जरूरी है। जब उपभोक्ता अदालतों में सुनवाई नियमित होगी, मामलों का निपटारा तय समय में होगा और लापरवाही करने वालों की जवाबदेही तय होगी, तभी आम जनता का भरोसा मजबूत होगा और अदालतों का सम्मान भी बना रहेगा।

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उपभोक्ता अदालतों में हर तारीख पर सुनवाई, मामलों के निपटारे की समयसीमा तय करने और अनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदारी निर्धारित करने की जरूरत है। समय पर न्याय मिलेगा, तभी उपभोक्ताओं का भरोसा और अदालतों का सम्मान मजबूत होगा।