लाइव ज़ोन || समीर खान
प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं, रक्त वाहिकाओं और दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है प्रभाव
पटना, 1 नवंबर 2026। सर्दियों की शुरुआत के साथ कई शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। जहरीली हवा का असर केवल फेफड़ों पर ही नहीं, बल्कि दिल और रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासतौर पर पहले से हाई बीपी, डायबिटीज या दिल की बीमारी से परेशान लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
प्रदूषण से कैसे बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर?
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल कुमार जैन के अनुसार, हवा में मौजूद बेहद छोटे प्रदूषण कण यानी PM2.5 सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचते हैं। ये शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं। इससे रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है।
जब रक्त वाहिकाएं कम लचीली हो जाती हैं, तो दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने की आशंका हो सकती है।
सर्दियों में क्यों बढ़ जाती है परेशानी?
सर्दियों में कम हवा चलने और मौसम की कुछ परिस्थितियों के कारण प्रदूषण जमीन के नजदीक जमा हो सकता है। इससे लोग लंबे समय तक खराब हवा के संपर्क में रहते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, किडनी की बीमारी या हृदय रोग से जूझ रहे लोगों को अधिक सावधानी रखनी चाहिए। बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों के लिए भी प्रदूषण चिंता का विषय है।
दिल को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये सावधानियां
- बाहर निकलने से पहले अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) जरूर देखें।
- प्रदूषण बहुत ज्यादा होने पर खुले में तेज दौड़ने और भारी व्यायाम से बचें।
- खराब हवा के दिनों में घर के अंदर सुरक्षित वातावरण में व्यायाम करें।
- बाहर जाना जरूरी हो तो सही फिटिंग वाला N95 या समकक्ष मास्क इस्तेमाल करें।
- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज नियमित रूप से बीपी की जांच करें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेते रहें और अपनी मर्जी से दवा बंद न करें।
- घर में धूम्रपान और कचरा जलाने जैसी गतिविधियों से बचें।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
लगातार सांस फूलना, सीने में दर्द या दबाव, असामान्य धड़कन और अचानक चक्कर आने जैसी समस्याओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए। सीने में तेज दर्द, गंभीर सांस की परेशानी या बेहोशी की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण को केवल सांस की बीमारी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। साफ हवा, नियमित स्वास्थ्य जांच और सावधानी से दिल की सेहत को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
