-लाइव ज़ोन || समीर खान
बिहार MLC चुनाव: सुरेश राय की जीत से बेगूसराय को मिली शिक्षक सीट, सर्वेश सिंह की हार से टूटा दोहरी जीत का सपना
पटना, 29 अक्टूबर 2026। बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों में बेगूसराय जिला इतिहास रचने से चूक गया। दरभंगा स्नातक सीट पर भाजपा प्रत्याशी सर्वेश कुमार सिंह की हार के कारण बेगूसराय के पास दरभंगा की शिक्षक और स्नातक, दोनों विधान परिषद सीटें एक साथ जीतने का मौका हाथ से निकल गया। हालांकि, शिक्षक सीट पर जन सुराज पार्टी के सुरेश प्रसाद राय की जीत ने जिले को बड़ी कामयाबी दिलाई। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मदन मोहन झा को हराकर 13 साल बाद यह सीट बेगूसराय के खाते में वापस ला दी।
आखिरी दौर में पलटा चुनाव का नतीजा
दरभंगा स्नातक सीट पर सर्वेश कुमार सिंह मुकाबले में मजबूत स्थिति में थे। वह 2020 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीतकर विधान पार्षद बने थे। इस बार भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया था। मतगणना के पहले चरणों में वह राजद प्रत्याशी अनिल झा से आगे चल रहे थे। एलिमिनेशन राउंड में भी वह आखिरी तीन प्रत्याशियों तक अपनी बढ़त बनाए हुए थे।
हालांकि, जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी मोहम्मद इम्तियाज के बाहर होने के बाद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती में मुकाबला बदल गया। सर्वेश कुमार सिंह पिछड़ गए और अनिल झा ने बढ़त बनाकर जीत हासिल कर ली। इस नतीजे ने बेगूसराय के दोनों सीटें जीतने की उम्मीद पर पानी फेर दिया।
सुरेश राय ने 13 साल बाद बेगूसराय को दिलाई जीत
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सुरेश प्रसाद राय की जीत बेगूसराय के लिए खास रही। उन्होंने कांग्रेस के मदन मोहन झा को हराया। वर्ष 2020 के चुनाव में सुरेश राय भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें मदन मोहन झा से हार का सामना करना पड़ा था। इस बार उन्होंने जन सुराज पार्टी का दामन थामा और जीत दर्ज की।
मदन मोहन झा लगातार दो चुनाव जीतकर करीब 12 साल तक इस सीट के विधान पार्षद रहे। सुरेश राय की जीत से बेगूसराय के शिक्षक नेताओं का इस सीट पर पुराना दबदबा एक बार फिर सामने आया है।
42 साल के इतिहास में शिक्षक सीट पर बेगूसराय का दबदबा
दरभंगा शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का मौजूदा स्वरूप 1984 में परिसीमन के बाद बना था। शिक्षक सीट में दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जिले शामिल हैं।
इस सीट के पहले चुनाव में बेगूसराय के शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने जीत दर्ज की थी। वह 1984 और 1990 में लगातार विधान पार्षद चुने गए। 1996 में वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर बलिया लोकसभा सीट से सांसद बने।
इसके बाद बेगूसराय के शिक्षक नेता वासुदेव सिंह ने 1996 में यह सीट जीती। वह लगातार तीन बार विधान पार्षद चुने गए और 2013 में निधन तक इस पद पर रहे। उनके बाद कांग्रेस के मदन मोहन झा ने दो चुनाव जीतकर करीब 12 साल तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। अब सुरेश राय की जीत से बेगूसराय को यह सीट फिर मिल गई है।
इस तरह शिक्षक सीट के करीब 42 साल के इतिहास में बेगूसराय के नेताओं का लंबे समय तक प्रभाव रहा है। शत्रुघ्न प्रसाद सिंह और वासुदेव सिंह के बाद सुरेश राय की जीत ने जिले की राजनीतिक पकड़ को फिर मजबूत किया है।
स्नातक सीट पर पहले मधुबनी का रहा दबदबा
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शुरुआती वर्षों से मधुबनी के नेताओं का प्रभाव रहा। वर्ष 1984 में कांग्रेस के कमलनाथ सिंह ठाकुर पहली बार जीते और 1990 में भी अपनी सीट बचाने में सफल रहे। इसके बाद मधुबनी के नीलांबर चौधरी ने 1996 और 2002 में लगातार दो बार जीत दर्ज की।
नीलांबर चौधरी के निधन के बाद 2007 में उनके बेटे दिलीप चौधरी उपचुनाव जीतकर विधान पार्षद बने। वर्ष 2008 में जनता दल यूनाइटेड के विनोद चौधरी ने दिलीप चौधरी को हराया। इसके बाद 2014 में दिलीप चौधरी कांग्रेस के टिकट पर फिर जीते।
2020 के चुनाव में दिलीप चौधरी जदयू के प्रत्याशी थे, जबकि सर्वेश कुमार सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे। सर्वेश ने उन्हें हराकर बेगूसराय के लिए इस सीट पर पहली जीत दर्ज की थी। इस बार वह भाजपा के उम्मीदवार थे, लेकिन राजद के अनिल झा से हार गए।
दोहरी जीत का मौका हाथ से निकला
बेगूसराय का दरभंगा शिक्षक सीट पर लंबे समय तक प्रतिनिधित्व रहा है, जबकि स्नातक सीट पर जिले का प्रभाव सीमित रहा। सर्वेश कुमार सिंह की जीत से बेगूसराय पहली बार दोनों सीटों पर एक साथ कब्जा जमा सकता था। लेकिन अंतिम दौर में दूसरी वरीयता के मतों ने चुनाव का रुख बदल दिया।
दूसरी ओर, अनिल झा की जीत से दरभंगा स्नातक सीट पर जिले को नया प्रतिनिधित्व मिला है। सुरेश प्रसाद राय की शिक्षक सीट पर जीत और सर्वेश कुमार सिंह की हार ने इस चुनाव को बेगूसराय और दरभंगा, दोनों जिलों के राजनीतिक इतिहास के लिहाज से अहम बना दिया है।
