मनेर एनकाउंटर पर उठे सवाल: तीन मौतों के बाद पुलिस की भूमिका पर बहस, निष्पक्ष जांच की मांग

Live Zone

लाइव ज़ोन || समीर खान

शेरपुर दियारा में STF की कार्रवाई के बाद आमने-सामने आए पुलिस के दावे और परिजनों के आरोप, फॉरेंसिक रिपोर्ट से खुलेगा सच्चाई का रास्ता
पटना, 7 नवंबर 2026: बिहार के पटना जिले के मनेर थाना क्षेत्र के शेरपुर दियारा में 6 नवंबर को हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद मामला लगातार चर्चा में है। इस कार्रवाई में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि मनेर थानाध्यक्ष समेत पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर सामने आई। पुलिस इसे जवाबी कार्रवाई बता रही है, वहीं मृतकों के परिजनों ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस का दावा: दूसरी तरफ से हुई थी गोलीबारी
पुलिस के अनुसार, STF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम को सूचना मिली थी कि कुछ आपराधिक मामलों में वांछित लोग शेरपुर दियारा इलाके में मौजूद हैं। पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची तो कथित तौर पर दूसरी तरफ से गोलीबारी शुरू कर दी गई। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ में जय प्रकाश यादव उर्फ जेपी यादव, बबलू कुमार और सूरज कुमार उर्फ राजा शर्मा की मौत हुई। पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और कारतूस बरामद करने का दावा भी किया है। हालांकि, बरामद हथियारों और गोलीबारी से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि जांच रिपोर्ट से ही हो सकेगी।
परिजनों ने उठाए सवाल, कार्रवाई को बताया संदिग्ध
दूसरी तरफ मृतकों के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मुठभेड़ की परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिजनों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या तीनों को गिरफ्तार करने की कोशिश की गई थी या सीधे गोलीबारी हुई।
फिलहाल ये परिजनों के आरोप हैं। इनकी पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच या न्यायिक निष्कर्ष से नहीं हुई है।
रिंकू माली पर मुखबिरी का आरोप, अस्पताल में हुआ हंगामा
मुठभेड़ के बाद दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल में भी तनाव की स्थिति बनी। मृतकों के परिजनों ने रिंकू माली नाम के व्यक्ति पर पुलिस को सूचना देने और मुखबिरी करने का आरोप लगाया। इसके बाद अस्पताल परिसर में उसके साथ मारपीट की घटना हुई।
बीच-बचाव के दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों के घायल होने की खबर भी सामने आई। हालांकि, रिंकू माली के मुखबिर होने या उसकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी
इस पूरे मामले में कुछ सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब सामने आना जरूरी है। पुलिस को सूचना किसने दी थी? गोलीबारी की शुरुआत किस तरफ से हुई? क्या तीनों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया था? घटनास्थल से मिले हथियारों और कारतूसों की फॉरेंसिक जांच में क्या सामने आया? पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की परिस्थितियों को लेकर क्या जानकारी मिली?
इन सवालों का जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, FSL जांच, बैलिस्टिक रिपोर्ट, घटनास्थल के साक्ष्य और पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई के रिकॉर्ड से मिल सकता है।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी पूरी सच्चाई
मुठभेड़ में तीन लोगों की मौत एक गंभीर मामला है। पुलिस का पक्ष और परिजनों के आरोप, दोनों को जांच के दायरे में तथ्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए। यदि पुलिस की कार्रवाई कानून के अनुसार हुई है तो जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए। वहीं, यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर मुठभेड़ को फर्जी या पूरी तरह सही घोषित करना उचित नहीं होगा। इस मामले में निष्पक्ष जांच और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार जरूरी है।
सोशल मीडिया सारांश:
मनेर के शेरपुर दियारा में पुलिस मुठभेड़ के दौरान तीन लोगों की मौत के बाद मामला विवादों में है। पुलिस इसे जवाबी कार्रवाई बता रही है, जबकि परिजनों ने सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। जानिए पुलिस के दावे, परिजनों के आरोप और जांच से जुड़े अहम सवाल।