जांच के नाम पर बढ़ते मेडिकल खर्च से परेशान मरीज, जानिए कब सवाल पूछ सकते हैं और कहां कर सकते हैं शिकायत
पटना, 31 अक्टूबर 2026। इलाज कराने के दौरान कई मरीजों को डॉक्टर की पर्ची में एक साथ कई तरह की जांच लिखी हुई मिलती हैं। इनमें कुछ जांच इलाज के लिए जरूरी होती हैं, जबकि कुछ मामलों में मरीजों को उनकी जरूरत समझ नहीं आती। ऐसे में मरीजों के मन में सवाल उठता है कि क्या सभी टेस्ट कराना जरूरी है या नहीं। जांच के बढ़ते खर्च को लेकर मरीजों की चिंता भी बढ़ रही है।
डॉक्टर ज्यादा टेस्ट क्यों लिखते हैं?
ज्यादा जांच लिखने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इनमें कुछ कारणों पर मरीजों और स्वास्थ्य क्षेत्र में सवाल भी उठते रहे हैं।
- कमीशन का आरोप: कुछ मामलों में डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कमीशन या रेफरल फीस के आरोप सामने आते हैं। हालांकि, हर डॉक्टर या हर जांच को इस तरह की गतिविधि से जोड़ना सही नहीं है।
- कानूनी जोखिम से बचने की कोशिश: कुछ डॉक्टर बीमारी की सही पहचान और इलाज में किसी संभावित चूक से बचने के लिए अतिरिक्त जांच की सलाह दे सकते हैं। इसे मेडिकल भाषा में डिफेंसिव मेडिसिन कहा जाता है।
- अस्पतालों का व्यावसायिक दबाव: कुछ अस्पतालों में जांच और अन्य सेवाओं को लेकर व्यावसायिक दबाव की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
मरीजों के पास कौन-कौन से अधिकार हैं?
मरीज को इलाज के दौरान अपनी बीमारी, जांच और खर्च से जुड़ी जानकारी जानने का अधिकार है।
जांच की वजह जानने का अधिकार: मरीज डॉक्टर से पूछ सकता है कि जांच क्यों जरूरी है और उसका परिणाम इलाज को कैसे प्रभावित करेगा।
लैब चुनने का विकल्प: अस्पताल या डॉक्टर द्वारा सुझाई गई लैब के अलावा दूसरी उपयुक्त और मान्यता प्राप्त लैब का विकल्प भी पूछा जा सकता है। हालांकि, कुछ विशेष जांचों में तकनीकी सुविधाओं और नमूने की शर्तों का ध्यान रखना जरूरी है।
खर्च की जानकारी: मरीज जांच कराने से पहले उसकी कीमत और उपलब्ध विकल्पों के बारे में जानकारी मांग सकता है।
दूसरी राय लेने का अधिकार: मरीज किसी अन्य योग्य डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज और जांच के बारे में अपनी शंका दूर कर सकता है।
गैर-जरूरी जांच से बचने के लिए क्या करें? - डॉक्टर से सवाल पूछें: पर्चे में जांच लिखे जाने पर पूछें कि यह टेस्ट किस बीमारी की पहचान के लिए है और इसके नतीजे से इलाज में क्या बदलाव होगा।
- दूसरी राय लें: अगर जांच महंगी है या उसकी जरूरत समझ में नहीं आ रही है, तो किसी दूसरे योग्य डॉक्टर से सलाह लें। हालांकि, जरूरी जांच को बिना चिकित्सकीय सलाह के टालना ठीक नहीं है।
- सभी रिपोर्ट संभालकर रखें: पहले कराई गई जांच की रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाएं। इससे जरूरत पड़ने पर एक ही जांच दोबारा कराने से बचा जा सकता है।
- शिकायत कहां करें: अगर किसी अस्पताल या डॉक्टर पर अनैतिक तरीके से जांच कराने का दबाव बनाने या कमीशन लेने का आरोप है, तो मरीज संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में शिकायत कर सकता है। शिकायत के साथ पर्ची, बिल और अन्य जरूरी दस्तावेज रखना उपयोगी होगा।
इलाज में पारदर्शिता जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर जांच का कोई चिकित्सकीय कारण होना चाहिए। मरीज को भी अपने इलाज के बारे में सवाल पूछने और जानकारी हासिल करने में संकोच नहीं करना चाहिए। वहीं डॉक्टरों की जिम्मेदारी है कि वे मरीज को जांच की जरूरत, संभावित खर्च और दूसरे विकल्पों के बारे में साफ जानकारी दें।
याद रखें: हर अतिरिक्त जांच गैर-जरूरी नहीं होती। जांच करानी है या नहीं, इसका फैसला बीमारी, लक्षण और डॉक्टर की चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही करें।
