-लाइव ज़ोन || समीर खान
Bihar MLC Election 2026: रोहिणी आचार्य का दावा, तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर के वोट जुड़ें तो BJP-NDA की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
पटना, 29 अक्टूबर 2026। बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को लेकर एक राजनीतिक फॉर्मूला पेश किया है। उन्होंने दावा किया कि अगर दोनों नेताओं की पार्टियों को मिले वोट एक साथ जुड़ जाएं, तो भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को सभी आठ सीटों पर हार का सामना करना पड़ सकता था। NDTV India+1
रोहिणी आचार्य ने क्या दिया राजनीतिक फॉर्मूला?
रोहिणी आचार्य ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बिहार MLC चुनाव के नतीजों का जिक्र किया। उन्होंने तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर के नाम के शुरुआती अक्षरों को जोड़ते हुए लिखा, ‘TJ + PK = BJP/NDA ZERO’। इस संदेश के जरिए उन्होंने संकेत दिया कि तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर के राजनीतिक समीकरण से भाजपा और NDA को चुनौती दी जा सकती है।
रोहिणी ने अपने पोस्ट में दावा किया कि RJD और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवारों को मिले वोटों को जोड़ दिया जाए, तो भाजपा और NDA आठों सीटों पर पहले वरीयता के मतों की गिनती में ही मुकाबले से बाहर हो सकते थे। हालांकि, यह रोहिणी आचार्य का राजनीतिक आकलन है। इसे चुनाव के वास्तविक नतीजे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। NDTV India
बिहार MLC चुनाव के नतीजों ने क्यों बढ़ाई चर्चा?
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव परिणाम 28 और 29 अक्टूबर को सामने आए। इन नतीजों में RJD ने दो सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को दो और जदयू को एक सीट मिली। जन सुराज पार्टी ने भी एक सीट जीतकर विधान परिषद में अपना खाता खोला। दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। AajTak+1
इन नतीजों के बाद रोहिणी आचार्य ने अलग-अलग दलों के वोटों को जोड़कर चुनावी समीकरण समझाने की कोशिश की। उनके बयान ने बिहार में विपक्षी दलों के बीच संभावित तालमेल को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
क्या तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर साथ आएंगे?
तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली RJD और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी बिहार में अलग-अलग राजनीतिक आधार के साथ सक्रिय हैं। दोनों दलों की विचारधारा, चुनावी रणनीति और समर्थकों के बीच अंतर भी किसी संभावित गठबंधन के आकलन में अहम होगा।
रोहिणी आचार्य के बयान को दोनों दलों के बीच संभावित तालमेल की चर्चा के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उनके पोस्ट में किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल, दोनों दलों के साथ आने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
वोटों को जोड़ने का गणित कितना सही?
रोहिणी आचार्य के दावे का आकलन करने के लिए आठों सीटों के चुनाव परिणाम, उम्मीदवारों को मिले मत और वरीयता के आधार पर हुई मतगणना को समझना जरूरी है। विधान परिषद चुनाव में मतों की गिनती के दौरान दूसरी और आगे की वरीयता के वोट भी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
दरभंगा स्नातक सीट इसका एक उदाहरण रही। यहां भाजपा के सर्वेश कुमार सिंह शुरुआती मतगणना में आगे थे, लेकिन दूसरी वरीयता के मतों के हस्तांतरण के बाद RJD के अनिल झा ने जीत दर्ज की। India News – The Indian Express+1
इसलिए अलग-अलग पार्टियों को मिले वोटों को सीधे जोड़ना और यह मान लेना कि गठबंधन होने पर सभी मत उसी गठबंधन को मिलेंगे, दोनों अलग बातें हैं। गठबंधन की स्थिति में उम्मीदवारों की स्वीकार्यता, मतदाताओं की पसंद और स्थानीय चुनावी समीकरण भी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा?
रोहिणी आचार्य के बयान ने बिहार में विपक्षी एकजुटता और संभावित चुनावी तालमेल पर बहस को तेज कर दिया है। हालांकि, MLC चुनाव के आंकड़ों के आधार पर विधानसभा चुनाव के नतीजों का सीधा अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। दोनों चुनावों की परिस्थितियां और मतदाताओं का दायरा अलग हो सकता है।
अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि क्या तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर भविष्य में किसी मुद्दे पर साथ आ सकते हैं। फिलहाल, रोहिणी आचार्य का बयान एक राजनीतिक सुझाव और चुनावी गणित पर आधारित दावा है, न कि RJD और जन सुराज के बीच गठबंधन की आधिकारिक घोषणा।
